अगले 100 वर्षों में भारत को होंगे सिर्फ छह सूर्यग्रहण के दर्शन - Bhaskar Crime

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अगले 100 वर्षों में भारत को होंगे सिर्फ छह सूर्यग्रहण के दर्शन

साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लग चुका है। उत्तर भारत में सूर्यग्रहण का पूर्ण नहीं बल्कि आंशिक प्रभाव ही दिखाई देगा, लेकिन दक्षिण भारत के तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के कई हिस्सों में पूर्ण कुंडलाकार सूर्यग्रहण का अद्भुत नजारा दिखाई देगा। 
सूर्यग्रहण की घटना सूर्य और पृथ्वी के मध्य में चंद्रमा आने के कारण होती है। दक्षिण भारत के अलावा सऊदी अरब, कतर, यूएई, ओमान, श्रीलंका, मलयेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, उत्तरी मारियाना द्वीप आदि में भी इसका पूर्ण रूप देखा जा सकेगा।

पृथ्वी पर सूर्यग्रहण सबसे पहले कतर और ओमान में शुरू होगा, वहीं भारत में यह केरल में कासरगोड के चेरुवथुर सेशुरू होगा। भारत के प्रमुख शहरों में सबसे पहले मुंबई में 8:04 बजे सूर्यग्रहण दिखाई दिया और अगरतला में सबसे देर यानी 11:39 बजे तक देखा जा सकेगा। वहीं, पोर्ट ब्लेयर में सबसे लंबे समय यानी 3:36 घंटे तक  सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा।

उत्तर भारत के प्रमुख शहरों में ग्रहण
शहर             शुरुआत        चरम          समाप्ति
नई दिल्ली
    08:17:01    09:30:53    10:57:07
चंडीगढ़       08:19:48    09:37:29    10:54:31
श्रीनगर        08:22:51    09:30:22    10:48:11

बिना सुरक्षा उपायों के नहीं देखें सूर्यग्रहण
सूर्यग्रहण को नग्न आंखों से देखने पर सूर्य का तेज उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। ग्रहण देखने के लिए केवल ऐसे चश्मे उपयोग किए जाने चाहिए, जो आईएसओ 12312-2 सर्टिफाइड हों। यह सुझाव अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने दिया है। हालांकि वेल्डिंग के दौरान उपयोग होने वाले चश्मे या पिनहोल प्रोजेक्टर के जरिये भी सूर्यग्रहण देखा जा सकता है।

अंधविश्वासों से बचें
सूर्यग्रहण के दौरान खाना, पीना और अपने रोजमर्रा के काम करना पूरी तरह सुरक्षित है। इससे कोई नुकसान नहीं होता।

अगले 100 वर्षों में भारत को होंगे महज 6 सूर्यग्रहण के दर्शन

नैनीताल । बृहस्पतिवार को ग्रहण के दौरान सूर्य एक आग के छल्ले जैसा दिखेगा। इसका कारण इन दिनों पृथ्वी से सूर्य अपेक्षाकृत निकट और चंद्रमा सामान्य से दूर यानी सूर्य के करीब है। ऐसे में चंद्रमा सूर्य को पूरा नहीं ढक पाएगा और इसकी परिधि नजर आती रहेगी।

नैनीताल के आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशनल साइंसेस के वैज्ञानिक शशिभूषण पांडे ने बताया कि एन्युलर (कुंडलाकार) सूर्यग्रहण में चंद्रमा सूर्य की परिधि के अलावा शेष भाग को ढक लेता है। ऐसे में इसकी परिधि रिंग ऑफ फायर जैसी दिखाई देती है।

भारत में इससे पहले कुंडलाकार सूर्यग्रहण 15 जनवरी 2010 को देखा गया था और अगला 21 जून 2020 को दिखाई देगा। खास बात है कि अगले 100 साल में भारतीयों को महज छह सूर्यग्रहण ही देखने को मिलेंगे। भारत में वर्ष 2020, 2031, 2034, 2064, 2085 तथा 2114 में सूर्यग्रहण दिखाई देंगे।

कुरुक्षेत्र में आज खास सूर्यग्रहण मेला
सूर्यग्रहण के दौरान कुरुक्षेत्र में बृहस्पतिवार को विश्वविख्यात मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु सन्निहित सरोवर और ब्रह्मसरोवर पर मोक्ष की डुबकी लगाने पहुंचेंगे। नेपाल, हिमाचल, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और अन्य प्रांतों के श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो चुका है। हालांकि महाभारतकालीन 48 कोस की परिधि में स्थित अन्य तीर्थों पर भी स्नान होगा। कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण का स्पर्श सुबह 8:15 बजे और मोक्ष सुबह 10:55 बजे होगा।

यह भी जानिये

  • जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह कवर करते हुए गुजरता है और उसे पूरी तरह ढंग देता तो यह पूर्ण सूर्यग्रहण होता है।
  • जब गुजरते हुए चंद्रमा की अंतरिक्ष में स्थिति सूर्य की तरफ अधिक करीब हो जाती है तो कुंडलाकार ग्रहण की स्थिति बनती है।
  • जब चंद्रमा सूर्य के किनारे से गुजरता है (उत्तर भारत की स्थिति के अनुसार) तो वहां आंशिक ग्रहण दिखाई देता है।
  • किसी एक जगह पूर्ण सूर्यग्रहण होने के बाद वहां अगली बार औसतन 140 साल बाद वापसी करता है।