विधानसभा चुनाव / सीएम के सामने भाजपा ने उतारा हारा प्रत्याशी, कांग्रेस प्रत्याशी का पहला चुनाव - Bhaskar Crime

Breaking

विधानसभा चुनाव / सीएम के सामने भाजपा ने उतारा हारा प्रत्याशी, कांग्रेस प्रत्याशी का पहला चुनाव

Add caption
  • भाजपा ने नामांकन के अंतिम दिन सुनील यादव का नाम घोषित किया 
  • कांग्रेस ने सीएम केजरीवाल के सामने  रोमेश सभरवाल  को उतारा है 

नई दिल्ली । (अखिलेश कुमार ) . विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन राजनीति और नई दिल्ली सीट पर चेहरा उतारने में खूब मशक्कत की। फिर भी भाजपा का 22 साल पुराना अकाली दल के साथ गठबंधन टूटा और जन नायक जनता पार्टी के साथ बात नहीं बनी। जेडीयू को दो सीटें संगम विहार और बुराड़ी व लोकजनशक्ति पार्टी को सीमापुरी सीट दे दी। लेकिन नई दिल्ली सीट को लेकर तमाम सेलिब्रिटी, लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों को टटोलने के बाद जब तैयार नहीं हुए तो एक ऐसे प्रत्याशी को उतारा जो युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं।
एक एमसीडी चुनाव एंड्रूज गंज वार्ड से लड़ने का अनुभव है जो 2012 में कांग्रेस प्रत्याशी से हार गए थे। गठबंधन की खिचड़ी और नाम फाइनल करने में नामांकन का दिन आ गया। नई दिल्ली सीट को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी के अलावा लोकसभा और राज्यसभा के कुछ सांसदों से भी बात की गई लेकिन सीधे तौर पर नेता तैयार नहीं हुए। यही वजह है कि इस सीट से प्रयासरत्त पहुंच रखने वाले युवा मोर्चा अध्यक्ष सुनील यादव को पार्टी ने उतार दिया। पेशे से वकील और डीडीसीए से जुड़े सुनील यादव का चेहरा सामने आने को लेकर राजनीतिक गलियारे में अरविंद केजरीवाल के सामने जूझने की क्षमता नहीं दिखाने की बातें सामने आ रही हैं।
कांग्रेस की बची सीटों का गणित
मादीपुर से जेपी पंवार, विकासपुरी से मुकेश शर्मा, बिजवासन से पूर्व उपमहापौर परवीन राणा, महरौली से सतबीर सिंह की जगह मोहिंदर चौधरी और ओखला से परवेज हाशमी को प्रत्याशी बनाया।
भाजपा की बची सीटों का गणित
नांगलोई जाट - सुमनलता शौकीन, राजौरी गार्डन-रमेश खन्ना, हरि नगर- तेजिंदर पाल बग्गा, दिल्ली कैंट- मनीष सिंह, नई दिल्ली- सुनील यादव, कस्तूरबा नगर- रविंद्र चौधरी, महरौली- कुसुम खत्री, कालकाजी- 
धर्मवीर सिंह, कृष्णा नगर- अनिल गोयल, शाहदरा- संजय
यादव तगड़े उम्मीदवार:प्रवीन शंकर 
अरविंद केजरीवाल संगठन को नहीं जानते इसलिए हल्का प्रत्याशी बता रहे हैं। 2013 में केजरीवाल तो नई दिल्ली के बाहर से आए थे। तीन बार की सीएम को हरा दिया था। सुनील यादव तो यहीं पले-बढ़े हैं। वो हल्के प्रत्याशी के तौर पर सामने वाले प्रत्याशी को लेकर राय बनाना चाहते हैं। वह 3 साल से तैयारी में थे। हमें टिकट यही देना था, सरप्राइज सामने वालों को किया हुआ था।
हमने दिल्ली का अपना प्रत्याशी उतारा: चोपड़ा 
हमने हल्का प्रत्याशी नहीं दिया। रोमेश सभरवाल यहीं पले बढ़े, गवर्नमेंट एम्प्लाई के बेटे हैं। समाज सेवा में जुटे हैं। ये कोई अरविंद केजरीवाल की तरह बाहर से नहीं आए हैं। चुनाव लड़ने का अनुभव पहली बार में थोड़ा होता है। चुनाव तो संगठन लड़वाता है।