मप्र / नर्मदा महोत्सव का आगाज: तीन दिन के उत्सव में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और मैथिली ठाकुर देंगे प्रस्तुतियां - Bhaskar Crime

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मप्र / नर्मदा महोत्सव का आगाज: तीन दिन के उत्सव में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और मैथिली ठाकुर देंगे प्रस्तुतियां

  • नर्मदा जयंती से शुरू हुआ महोत्सव 2 फरवरी तक चलेगा, पहले दिन सामूहिक योग और ट्रैकिंग होगी
  • उद्घाटन के बाद सीएम बोले- हमारी संस्कृति दिलों को जोड़ने वाली, भारत एक झंडे के नीचे खड़ा है

अमरकंटक. अनूपपुर जिले के अमरकंटक में नर्मदा महोत्सव का शुक्रवार को रंगारंग आगाज हुआ। नर्मदा जयंती से शुरू हुआ महोत्सव 2 फरवरी तक चलेगा, पहला दिन सामूहिक योग और ट्रैकिंग होगा। महोत्सव में गायक कैलाश खेर और मैथिली ठाकुर भी प्रस्तुति देने आएंगी। मंच से धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में होंगे।
मुख्यमंत्री ने किया उद्घाटन
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि नर्मदा जयंती पर अगले साल इससे बड़ा आयोजन होगा। उन्होंने कहा, "मैं मां नर्मदा की भूमि को प्रणाम करता हूं। कोई ऐसा देश नही जहां इतनी संस्कृति हो। हर दिशा में अलग-अलग रंग हैं। यही हमारी भारतीय संस्कृति है, जो सबको जोड़ती है, समेटती है। भारत एक झंडे के नीचे खड़ा है। दिल जोड़ने की हमारी संस्कृति है, इसे हमेशा स्वीकार करना है।" उन्होंने आगे कहा- इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। जिससे इस पूरे क्षेत्र के जनजीवन में बदलाव आए और इसके जरिए लोगों को रोजगार मिले।
'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' थीम पर होंगे आयोजन 
महोत्सव तीन दिन चलेगा जिसमें धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महोत्सव में शामिल होने पूरे देश से कलाकार और सैलानी आए हैं। अमरकंटक में आकर्षक साज-सज्जा की गयी है। महोत्सव 31 जनवरी से 2 फरवरी तक चलेगा। उत्सव में प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर और मैथिली ठाकुर अपनी प्रस्तुतियां देंगे। महोत्सव के पहले दिन शुक्रवार को सामूहिक योग और ट्रैकिंग के लिए रखा गया। उत्सव का दूसरा दिन बेटियों को समर्पित रहेगा। 1 फरवरी को 2100 बेटियों को भोजन कराया जाएगा। इस पूरे दिन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ थीम पर कार्यक्रम होंगे।
कल मैथली और 2 को कैलाश आएंगे
01 फरवरी की शाम गायिका मैथली ठाकुर संगीतमय प्रस्तुति देंगी। कार्यक्रम के अंतिम दिन प्रसिद्ध पार्श्व गायक कैलाश खेर और उनका बैंड कैलाशा अपना कार्यक्रम पेश करेगा। आयोजन में आदिवासी संस्कृति की छटा बिखरी हुई है। 100 से ज़्यादा नृत्य दल यहां कर्मा, सुआ, शैला जैसे 8 प्रकार के आदिवासी नृत्य पेश करेंगे।