बजट में मध्यप्रदेश / इस साल राज्यों के हिस्सों पर चली केंद्र की कैंची, मप्र के हिस्से के 14 हजार करोड़ रुपए काटे - Bhaskar Crime

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बजट में मध्यप्रदेश / इस साल राज्यों के हिस्सों पर चली केंद्र की कैंची, मप्र के हिस्से के 14 हजार करोड़ रुपए काटे

  • केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश के लिए कोई विशेष योजना जिक्र नहीं, रेल और स्वास्थ्य सेक्टर में भी कुछ खास नहीं दिया
  • मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्रीय बजट को राज्य के हितों पर कुठाराघात बताय, उन्होंने कहा- केंद्रीय करों में मिलने वाली हिस्सेदारी में बड़ी कटौती की गई

भोपाल . केंद्रीय बजट में मध्यप्रदेश के लिए कोई विशेष योजना या घोषणा का जिक्र नहीं है, न ही रेल और स्वास्थ्य सेक्टर को कुछ खास दिया गया। ऊपर से केंद्र सरकार ने केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से में भारी कटौती कर दी। चालू वित्तीय वर्ष में इन करों में मप्र को 14 हजार 233 करोड़ रुपए कम मिलेंगे। इसके अलावा अगले वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए केंद्रीय करों का हिस्सा एक फीसदी कम कर दिया गया है। अभी तक यह 42 फीसदी था, जो अगले वित्तीय वर्ष के लिए 41 फीसदी होगा। इस कटौती का सीधा असर राज्य में चल रहीं राजस्व योजनाओं पर पड़ना तय है। दरअसल, बजट भाषण में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय करों में राज्यों के हिस्से का रिवाइज एस्टीमेट भी जारी किया। इससे मप्र को वित्तीय वर्ष 2019-20 में सीधे तौर पर 11 हजार 556 करोड़ राशि और कम मिलेगी। पिछले बजट में ही केंद्र सरकार ने 2677 करोड़ रुपए कम कर दिए थे। इस वित्त वर्ष के अब बचे हुए दो माह फरवरी और मार्च से पहले उन्होंने बड़ी राशि और घटा दी। 
राज्य पर असर... कर्जमाफी का दूसरा चरण शुरू, 4500 करोड़ रुपए की जरूरत
राज्य के हिस्से में हुई राजस्व कटौती से खासतौर पर किसानों की कर्जमाफी प्रभावित होगी, क्योंकि इसका दूसरा चरण राज्य सरकार ने प्रारंभ कर दिया है। इस चरण में 50 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक कर्ज माफ होना है। इसमें करीब 4500 करोड़ रुपए की जरूरत है। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, अमृत, पोषण आहार कार्यक्रम और आंगनबाड़ी सेवाओं आदि में राज्यांश देने के लिए मप्र को नए विकल्प देखने होंगे।
ये बजट राज्य के हितों पर कुठाराघात : कमलनाथ 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्रीय बजट को राज्य के हितों पर कुठाराघात बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की केंद्रीय करों में मिलने वाली हिस्सेदारी में 11 हजार 556 करोड़ रुपए की कटौती की गई है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही 2677 करोड़ रुपए कम कर दिए गए थे। राज्य कैसे काम करेंगे। वित्तमंत्री का भाषण लंबा जरूर रहा, लेकिन ये आंकड़ों का मायाजाल होकर निराशाजनक व हवाई सपने दिखाने वाला रहा। इसमें गांव, गरीब, किसान, युवा रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कुछ भी नहीं है। बेरोजगारी दूर करने के लिए व युवाओं को रोजगार देने का जिक्र तक इस बजट में नहीं है। 
अनुमान से ढाई हजार करोड़ ज्यादा कटौती 
मप्र के वित्त अफसरों ने नवंबर-दिसंबर तक के टैक्स कलेक्शन के आधार पर अनुमान लगाया था कि चालू वित्तीय वर्ष के आखिर के दो महीनों में पैसा कम मिलेगा। केंद्रीय करों के हिस्से में 9000 करोड़ तक की कटौती हो सकती है। पर, रिवाइज एस्टीमेट में यह ढाई हजार करोड़ रु. और बढ़ गई। जो 22.3% है।
एक फीसदी हिस्सा कम होने का ज्यादा असर नहीं
वित्त अधिकारियों का कहना है कि अगले वर्ष में 1% कटौती का कुल राशि पर ज्यादा असर नहीं होगा।  चालू वित्त वर्ष में एस्टीमेट 63 हजार 751 करोड़ रु. था। इसे जुलाई 2019 के केंद्रीय बजट में 61 हजार 74 करोड़ कर दिया गया था। यही राशि मप्र को मिलनी थी। यही एस्टीमेट अब अगले वित्तीय वर्ष का भी रखा गया है।
राहत... 36 हजार व्यापारी फिर कर सकेंगे कारोबार
टैक्स रिपोर्टर. भोपाल | केंद्र सरकार ने आम बजट में उन व्यापारियों को थोड़ी राहत दी है जिनके रजिस्ट्रेशन पिछले माह रिटर्न न भरने के कारण रद्द हो गए थे। भोपाल में ऐसे 6 हजार और मप्र में 36 हजार व्यापारी हैं। पुरानी व्यवस्था के तहत उन्हें 30 दिन के भीतर सक्षम अधिकारियों के पास अपील करनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में यह सीमा बढ़ाकर 90 दिन कर दी गई है। 
इसमें पहली तीस दिन की सीमा खत्म होने के बाद वे अगले तीन दिन में अपने क्षेत्र के संयुक्त आयुक्त के पास 30 दिन और उसके बाद फिर कमिश्नर स्तर के अधिकारी के पास अतिरिक्त 30 दिन के भीतर अपील कर सकेंगे। कुछ तकनीकी दिक्कतों और प्रक्रिया की जानकारी न होने की वजह से व्यापारी पहले 30 दिन में यह रजिस्ट्रेशन फिर से प्राप्त करने के लिए आवेदन नहीं कर पाए थे। वर्तमान व्यवस्था के तहत कंपोजिशन वाले व्यापारी लगातार तीन रिटर्न और नियमित व्यापारी और उद्यमी छह माह तक रिटर्न न भरें तो उनके पंजीयन कैंसिल हो जाते हैं। जीएसटी विशेषज्ञ मुकुल शर्मा कहते हैं कि कैंसिल रजिस्ट्रेशन को फिर से शुरू करना व्यापारियों के लिए एक बड़ी समस्या रहा है। ज्यादातर कैंसिलेशन सीधे पोर्टल के माध्यम से हो जाते हैं।