सचिन पायलट कम उम्र में राजनीतिक विरासत मिला - Bhaskar Crime

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सचिन पायलट कम उम्र में राजनीतिक विरासत मिला

काँग्रेसी दिग्गज स्व० राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारुख अब्दुल्ला की बेटी सारा अब्दुला (जम्मू-कश्मीर के ही पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बहन) की मुलाकात लंदन में हुयी थी, जब दोनों वहां पढ़ाई कर रहे थे।
शुरुआती मुलाकातें कब प्यार में बदल गयीं पता ही नहीं चला। पर दोनों अलग-अलग धर्मों से थे, तो पता था कि समस्या आगे आनी है।
हिन्दू गुज्जर जाति से आने वाले पायलट परिवार को तो कोई दिक्कत नहीं थी, पर कश्मीर की राजनीति पर काबिज़ रहने वाले सुन्नी मुस्लिम खानदान से ताल्लुक़ रखने वाले अब्दुल्ला परिवार को यह रिश्ता बिल्कुल पसन्द नहीं था!
कश्मीर में तब आंदोलन तक चलने लगा कि कैसे कश्मीरी मुस्लिम लड़की की शादी किसी काफ़िर से हो सकती है। पर एक-दूसरे की मोहब्बत में पूरी तरह डूबे हुए सचिन और सारा अडिग थे।
यह हाल तब था जब सारा अब्दुल्ला के सगे भाई उमर अब्दुल्ला की शादी पाकिस्तानी पंजाब के लाहौर से मूल सम्बद्ध रखने वाले एक भारतीय हिन्दू परिवार की लड़की पायल नाथ से 1994 में ही हुयी थी। तब उमर और पायल नयी दिल्ली के ओबेरॉय होटल से जुड़े हुए थे। पायल नाथ के पिता भारतीय सेना में कार्यरत थे।
उस पर कि खुद उमर और सारा के पिता फ़ारुख अब्दुल्ला की पत्नी मौली अब्दुल्ला एक ईसाई परिवार से ताल्लुक़ रखती थीं। पर दिक्कत थी कि जब लड़के मुस्लिम रहें तब तो चलेगा कि वह किसी से निकाह कर लें, परन्तु गर मुस्लिम लड़की किसी काफ़िर से विवाह करेगी तो यह नाक़ाबिले-बरदाश्त बात थी!
पर 2004 में आखिरकार सारा अब्दुल्ला और सचिन पायलट परिणय सूत्र में बंध ही गए और सारा अब्दुल्ला ने मज़हबी कट्टरपंथियों के खिलाफ कमाल की हिम्मत दिखायी। जैसा कि स्पष्ट था, अब्दुल्ला खानदान अपनी बेटी की शादी में शामिल नहीं हुआ क्योंकि उन्हें मज़हबी कश्मीर में इसका सियासी नुकसान हो सकता था!
वैसे अब्दुल्ला परिवार में पायल नाथ को अच्छा नहीं लगा और उमर अब्दुल्ला से खटपट के बाद पायल और उमर ने 2011 में तलाक़ ले लिया। जबकि इधर सचिन और सारा अभी तक साथ बने हुए हैं!
फिलहाल युवा सचिन पायलट राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री हैं और अपने पिता की असामयिक मृत्यु के बाद काँग्रेस में इनका ग्रोथ सही ही रहा है। काफी कम उम्र में
ही राजनीतिक विरासत के कारण इन्हें वह तमाम चीजें उपलब्ध हो गयीं, जिसके लिए बाकी लोग तमाम ज़िन्दगी चप्पलें घिसते रह जाते हैं!