भारत सरकार द्वारा परिवार परामर्श समझौता ऑनलाइन - Bhaskar Crime

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भारत सरकार द्वारा परिवार परामर्श समझौता ऑनलाइन

लॉकडाउन के दौरान परिवार परामर्श में प्रतिदिन पति पति द्वारा रोज आवेदन आ रहे हैं (मनोज विश्वकर्मा न्यूज़ संपादक)


इस महीने ढाई सौ आवेदन आ चुके क्योंकि लाकडाउन पति घर में रहकर और परिवार साथ है छोटी-छोटी बातों से विवादहो रहे हैं 
लॉकडाउन के दौरान पति पत्नी मैं तूफान घमासान विवदआ और आत्म हत्या की धमकी दिया जा रहा है

आवेदन एसपी महोदय के द्वारा परिवार परामर्श और महिला सेल में भेजा जाता है दोनों को समझा कर परामर्श की सलाह दिया जाता है
कि भारत सरकार द्वारा बढ़ती समस्या को लेकर एक नई योजना किया जा रहा है जो फोन के द्वारा ऑनलाइन समस्या का निकाल किया जाएगा
और पति पत्नी के बीच में कले ना हो इसलिए दोनों को समझाया जा सकता है छोटी-छोटी बातों को लेकर आए दिन पति पत्नियों में तले मजा आ रहा है
सामाजिक जस्टिस ए आने आने परिवारों और रिश्तेदारों में क्लेश होगा
इसलिए परिवार परामर्श केंद्र शिकायत आते ही परिवार परामर्श द्वारा एक पंपलेट पढ़ने लिए दिया जाता है जो पति पति को पढ़कर नियम पालन करना पड़ता है
जबलपुर पुलिस परिवार परामर्श केंद्र के वरिष्ठ परामर्शदाता के अनुभव र पर पारिवारिक झगडे सुलझाते हैं ये हमारे तजुर्बे पर आधारित है। ये के लिए सुझाव मात्र है।

अपने बेटे और पुत्र वधु को विवाह उपरांत अपने साथ रहने के लिए
उत्साहित न करें, उत्तम हैं उन्हें अलग, यहां तक कि किराये के मकान में भी रहने को कहें, अलग घर ढूँढना उनकी परेशानी है। आप और बच्चों के घरों की अधिक दूरी आप के संबंधों को बेहतर बनाएगी। अपनी पुत्र वधु से अपने पुत्र की पत्नी कि तरह व्यवहार करें, न की अपनी बेटी की तरह. अ.प मित्रवत् हो सकते हैं। आपका पुत्र सदैव आप से छोटा रहेगा, कितु उसकी पत्नि नहीं, अगर एक बार भी उसे डांट देगें तो वह

सदैव याद रखेगी। वास्तविकता में केवल उसकी माँ या पिता ही उसे डांटने या सुधारने का एकाधिकार रखते है आप नहीं।

आपकी पुत्रवधु की कोई भी आदत या उसका चरित्र किसी भी अवस्था में आपकी नहीं, आपके पुत्र की परेशानी है, क्योंकि पुत्र व्यस्क है। इकट्ठे रहते हुए भी अपनी अपनी जिम्मेदारियां स्पष्ट रखें, उनके कपड़े न धोयें, खाना न पकायें या आया का काम न करें, जब तक पुत्रवधू उसके लिए आप से प्रार्थना न करें, और अगर आप ये करने में सक्षम है, एवं प्रति उपकार भी नहीं चाहते तो। विशेषतः अपने पुत्र की परेशानियों को अपनी परेशानी न बनने. से स्वयं हल करने दें।

जब वह लड़ रहे हों, गूंगे एवं बहरे बने रहें। यह स्वभाविक है कि छोटी उम्र के पति पत्नी अपने झगड़े में अभिभावकों का हरतक्षेप नहीं चाहते। आपके पोती-पोते केवल आपके पुत्र एवं पुत्रवधू के हैं वह उन्हें जैसा

हते हैं अपने दे, अच्छाई या दुराई के लिए वह रवय जिम्मेदार होगा आपकी पुत्रवधू को आपका सम्मान या सेवा करना जरूरी नहीं है, यह आपके बेटे का दायित्व है। आपको अपने बेटे को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए कि वह एक अच्छा इंसान बने जिससे आपके और आपकी पुत्रवधु के संबंध अच्छे। रहे



अपनी रिटायरमेंट को सुनियोजित करें, अपने बच्चों से उसमें ज्यादा 1हयोग की उम्मीद न करे। आप बहुत से पड़ाव अपनी जीवन यात्रा में नाय कर चुके हैं पर अभी भी जीवन यात्रा में बहुत कुछ सीखना है। यह आपके हित में है आप अपने रिटायरमेंट सालो का आनंद ले वेहतर है अगर आप अपनी मृत्यु से पूर्व उसका भरपूर आनंद लें जो आप ने जीवन र्यंत मेहनत करके वचाया है। अपनी कमाई को अपने लिए महत्वहीन न

ने दें। मापन नाती पोते आपके परिवार का हिस्सा नहीं है, वह अपने अभिभावकों धरोहर है।