कलेक्टर और उपआयुक्त आदिवासी से मिले ग्रामीण - Bhaskar Crime

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कलेक्टर और उपआयुक्त आदिवासी से मिले ग्रामीण

बरगी विस्थापितो को वनभूमि से बेदखली की धमकी

 


बरगी बांध से विस्थापित गांव पिंडरई ,नारायणगंज, मंडला द्वारा कृषि भूमि डूबने के बाद आजीविका हेतू 2002 से जंगल की खाली वनभूमि पर खेती कर रहे हैं। वन अधिकार कानून 2006 एवं नियम 2008 के अन्तर्गत 112 लोगों ने काबिज वनभूमि का वयक्तिगत वन अधिकार का दावा ग्राम सभा द्वारा गठित वन अधिकार समिति के समक्ष प्रस्तुत किया।12 अप्रेल 2018 को उक्त दावों का भौतिक सत्यापन वन अधिकार समिति, ग्राम सभा और वन विभाग के कर्मचारी की उपस्थिति में में किया गया। जिसमें दावेदारो द्वारा खेती किया जाना पाया गया।वन अधिकार कानून के प्रावधानों के अनुसार 13 दिसम्बर 2005 के पुर्व वनभूमि पर काबिज आदिवासी एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों को अधिकार पत्र देना सुनिश्चित किया गया है।12जुलाई 2012 को आदिवासी कल्याण मंत्रालय, दिल्ली ने अपने दिशा निर्देश में उल्लेख किया है कि किसी भी दावे को अमान्य करने का कारण दर्ज कर आदेश की एक प्रति दावेदार को उपलब्ध करानी होगी।जिसके आधार पर दावेदार अमान्य दावे के खिलाफ अपील में जा सकता है।परन्तु पिंडरई वासियों को आजतक लिखित में अमान्य होने की कोई सूचना नहीं मिला है।वन अधिकार समिति के सचिव पुरोषतम मलगाम ने बताया कि विगत 12 जुलाई को वन विभाग का अमला द्वारा काबिज वनभूमि को छोङने की धमकी देकर गया है।लोगों द्वारा बताया गया कि उक्त वनभूमि पर हमारा कब्जा है और प्रशासन के समक्ष दावे लगे हुए हैं जिसका निराकरण अभी होना बांकी है।उपरोक्त घटना के बाद कब्जेधारियों ने 13 जुलाई को बैठक कर निर्णय लिया कि हमलोग कब्जा किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे क्योंकि हमारे आजीविका का एकमात्र साधन बचा है।

 ग्रामीणों की ओर से सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग एवं कलेक्टर मंडला और निवास विधायक डाक्टर अशोक मरसकोले को घटना की जानकारी वाला ज्ञापन दिया गया है। वन अधिकार कानून की धारा 4(5) में उल्लेख है कि अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासियों का कोई सदस्य उसके अधिभोगाधीन वन भूमि से तबतक बेदखल नहीं किया जाएगा या हटाया जाएगा जबतक कि मान्यता और सत्यापन प्रकिया पूरी नहीं हो जाती है।

पुरोषतम मलगाम

सचिव, वन अधिकार समिति, पिंडरई,

नारायणगंज,मंडला (7999889248)

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