विद्युत गैस शवदाह दाह संस्कार, बंद होने की कगार पर शवदाह गृह,रानीताल विद्युत शवदाह गृह शुरू होते ही बंद हुआ - Bhaskar Crime

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विद्युत गैस शवदाह दाह संस्कार, बंद होने की कगार पर शवदाह गृह,रानीताल विद्युत शवदाह गृह शुरू होते ही बंद हुआ

कोरोना के दौर में गैस शवदाह गृह में अंत्येष्टि कराना न केवल सुरक्षित है बल्कि इससे समय और पैसे की भी बचत भी होगी।
एक शव की अंत्येष्टि 60 से 70 मिनट में ही हो जाएगी, जिसका खर्च तीन हजार रुपये होगा।
कोरोना से मृत लोगों की अंत्येष्टि का नगर निगम कोई शुल्क नहीं ले रहा। सामान्य मौत होने पर बतौर शुल्क तीन हजार लिए जा रहे हैं
सामान्य मुक्तिधाम में शवों की अंत्येष्टि में लगभग चार हजार रुपये तक खर्च होते हैं।

जबलपुर/ कोरोना संक्रमण काल में सामान्य और कोरोना से मृत लोगों के शवों की सुरक्षित तरीके से अंत्येष्टि के लिए शहर को गैस शवदाह गृह (एलपीजी क्रिकेटोरियम सिस्टम) की सौगात तो मिल गई। शहर को करीब 10 साल बाद आधुनिक शवदाह गृह की सौगात मिली थी लेकिन इसमें शवों का दाह संस्कार नहीं हो पा रहा है। लोग गैस से संचालित शवदाह गृह में अपने स्वजनों की अंत्येष्टि कराने से कतरा रहे हैं।
 *पिछले तीन माह के आंकड़ों पर गौर करें तो शवदाह गृह में महज 21 शवों की अंत्येष्टि हो पाई है।*

            *गुप्तेश्वर मुक्तिधाम से शुरुआतः*
गुप्तेश्वर मुक्तिधाम में 32 लाख रुपये खर्च कर मई 2020 में गैस शवदाह गृह की स्थापना की गई है। इसका संचालन नगर निगम कर रहा हैं। तत्कालीन कलेक्टर भरत यादव की पहल पर आधुनिक शवदाह गृह की स्थापना के पीछे की मंशा यही थी लोग कोरोना महामारी के इस दौर में सुरक्षित तरीके से शवों का दाह संस्कार किया जा सके।
*70 मिनट में हो जायेगी अंत्येष्टिः*
*यह है स्थिति* :
- मई 2020 में शुरू किया गया।
- 32 लाख रुपये आई लागत
- 3 हजार रुपये लिया जाता है शुल्क
-21 की अंत्येष्टि हो चुकी है। जिसमे कोरोना पॉजिटिव 12, संदिग्ध 7 और 2 की मौत सामान्य थी।
*रानीताल विद्युत शवदाह गृह शुरू होते ही बंद हुआ*
नगर निगम ने करीब 25 साल पहले रानीताल में एक विद्युत शवदाह गृह शुरू किया था। यह शवदाह गृह शुरू होते ही बंद हो गया। बताया जाता है कि दाह संस्कार के दौरान बिजली करंट सप्लाई में गड़बड़ी आने से दाह संस्कार की प्रकिया बीच में रुक गई थी। इसलिए इसे बंद करना पड़ा।
*परंपरा या लोगों का भरोसा*
गैस से संचालित शवदाह गृह में दाह संस्कार करने से लोग कतरा रहे हैं। जानकारों की माने तो अधिकांश लोग सनातनी और प्राचीन परंपरा से बंधे हुए हैं। चंदन, घी, लकड़ी से दाह संस्कार करना उचित मानते हैं। कुछ लोग इसलिए इस आधुनिक तकनीक पर भरोसा नहीं कर रहे। जिला और नगर निगम प्रसाशन को इसके लिए लोगों मे जागरूकता लानी होगी

बर्जन *भूपेंद्र सिंह , स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम* ने कहा कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के बीच गुप्तेश्वर मुक्तिधाम में गैस शवदाह गृह की स्थापना की गई है। लेकिन जागरुकता के अभाव और अन्य कारणों से लोग अंत्येष्टि करने आगे नहीं आ रहे हैं।