मध्यप्रदेश बाल आयोग सख्त हुआ,डीजीपी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग - Bhaskar Crime

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मध्यप्रदेश बाल आयोग सख्त हुआ,डीजीपी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग

*डीजीपी को पत्र लिखा; कहा- सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान उजाकर करने वालों पर कार्रवाई की जाए*

*हाथरस समेत अन्य घाटनाओं का जिक्र किया गया*
*सायबर एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग की*
   भोपाल  पीड़िता की पहचान उजागर करने वालों पर बाल आयोग सख्त हो गया है। मप्र बाल संरक्षण आयोग ने इस संबंध में डीजीपी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। आयोग के सदस्य ब्रजेश चौहान ने बताया कि पीड़िता की पहचान उजागर करने वालो पर सख्त कार्रवाई होना चाहिए।

पीड़िता का नाम, पिता का नाम, पता, घटना स्थल, संस्थान का नाम, पीड़िता के किसी भी परिजन की कोई जानकारी उजागर करने वालों के खिलाफ मामले दर्ज होना चाहिए। लोग बिना सोचे समझे ही सोशल मीडिया में इसे जानबूझकर इस तरह की जानकारी वायरल करने लगे हैं।

*सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का उल्लंघन है*

यह पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का उल्लंघन है। जे एंड जे एक्ट 2016 की धारा 74 और सायबर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। किसी भी तरह से पीड़िता की कोई भी जानकारी या पहचान उजागर नहीं की जा सकती है। अगर आरोपी परिचित है, तो उसका भी नाम या पहचान सामने नहीं लाई जा सकती है। इसमें साफ कहा गया है कि ऐसी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है, जिससे पीड़िता की पहचान हो सके।

*कई घटनाओं को शामिल किया*

चौहान ने कहा कि इसके लिए आयोग ने विभिन्न तरह की घटनाओं के संबंधित समाचार और सोशल मीडिया पर चलने वाले मैसेज, वीडियो और फोटो को शामिल गया है। इन मामलों में पीड़िता की जानकारियां उजागर हुईं हैं। इसी आधार पर इनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

*इस दायरे में सभी आते हैं*

किसी भी तरह के अपराध से संबंधित किसी भी पीड़िता या नाबालिग की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। यह सिर्फ मीडिया संस्थानों पर ही लागू नहीं होता, बल्कि सभी पर लागू होता है। किसी भी सार्वजनिक मंच या सोशल मीडिया पर उससे जुड़ी कोई भी जानकारी वायरल या शेयर किए जाना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में अनजाने में भी शेयर की गई जानकारी पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर करने का कानून है।