नवरात्र पर हवन-पूजन की शृंखला चलेगीमहापुण्य लाभ की अष्टमी - Bhaskar Crime

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नवरात्र पर हवन-पूजन की शृंखला चलेगीमहापुण्य लाभ की अष्टमी

नवरात्र पर हवन-पूजन की शृंखला चलेगी, माता रानी के आशीष पाने देवालयों में अर्चना महापुण्य लाभ की अष्टमी आज, दर्शन को उमड़े भक्त


जबलपुर नवरात्रि के नौ दिनों में माँ की मन लगाकर पूजा-अर्चना की जाती है। इन नौ दिनों के दौरान भक्त माँ को प्रसन्न करने और उनकी कृपा दृष्टि पाने के लिए व्रत करते हैं। अष्टमी तिथि को हवन होता है और नवमी वाले दिन कंजक पूजन के साथ नवरात्रि का समापन हो जाता है।


*अष्टमी तिथि को दुर्गाष्टमी* कहा जाता है, इस तिथि का अपने आप में एक विशेष महत्व माना गया है। संस्कारधानी की सबसे प्राचीन आदिशक्ति भगवती बूढ़ी खेरमाई विराजित हैं। जगतजननी अम्बे माता की नवरात्रि पर्व पर विशेष आराधना चल रही है। पुरातन काल से मान्यता है कि खेरमाई माता नगर में आई महामारी से भक्तों के कष्टों का निवारण करती हैं और भक्तों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

*इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना का कहर है, प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार* इस वर्ष सिर्फ 21 कलश जवारे, बोए गए हैं, बूढ़ी खेरमाई मंदिर के पुजारी राजू महाराज, आनंद बाजपेयी, दीपक पंडा, टीनू यादव ने बताया कि नित्य प्रति दिन पराम्बा की परम्परागत रूप से पूजा-अर्चना की जा रही है, पूजन का स्वरूप थोड़ा सा सीमित किया गया है, श्रद्धालु भक्तों द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग रखकर पूजा-अर्चना की जा रही है। जवारा जुलूस प्रशासन की गाइडलाइन के अनुसार ही निकाले जाएँगे


*माता महाकाली*

शहर के मध्य विराजित माता महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी जी अति प्राचीन दुर्लभ श्री विग्रह देवी रथ में विराजमान हैं। जुड़ी तलैया सराफा खटीक मोहल्ला में विराजित देवी रथ मंदिर के ओंकार, मुकेश राठौर ने बताया कि श्री महाकाली जी का मंदिर जुड़ी तलैया की भक्ति परम्परा बहुत पुरानी है, जिस का पुनः निर्माण सन् 2010 में सम्पन्न हुआ, जिसकी बनावट रथ नुमा होने के कारण इसका नाम देवी रथ रखा गया। इस मंदिर में लगभग सभी देवी देवताओं की मूर्तियाँ विराजमान हैं, प्रधान प्रतिमा श्री महाकाली जी की है। इस वर्ष कोरोना काल में परिस्थिति अनुपयुक्त होने के कारण सभी धार्मिक आयोजन स्थगित कर दिए गए हैं।

*अष्टमी-नवमी की संधि पूजा*

अष्टमी और नवमी एक ही दिन होने के बावजूद भी देवी माँ की अाराधना के लिए भक्तों को पूरे नौ दिन मिलेंगे। पं. रोहित दुबे के अनुसार शुक्रवार को सुबह 11:40 बजे से शुरू हुई अष्टमी तिथि शनिवार को सुबह 10:58 बजे तक रहेगी। 24 अक्टूबर को अष्टमी व्रत रखना उत्तम है। इस दिन महागौरी की पूजा का विधान है। दशमी तिथि 25 अक्टूबर से शुरू होकर 26 अक्टूबर की सुबह 11:30 बजे तक रहेगी। ऐसे में इस साल दशहरा का त्योहार 26 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

महाष्टमी शनिवार को*- महाष्टमी शनिवार को है। इसी दिन नवमी की पूजा भी होगी। पं. दुबे का कहना है कि कोरोना काल में यथासंभव हम पूजा में संयम बरतें, हर अहं भाव त्याग कर पूरी श्रद्धा के साथ माँ महिषासुर मर्दिनी का वंदन करें कि महामारी के संकट से उबरने की माँ हमें शक्ति प्रदान करें। पी-3

*श्री कालीधाम में नवमी पर भण्डारा नहीं होगा*

दंडी स्वामी प्यारेनंद कालिकानंद सरस्वती महाराज के निर्देश पर कालीधाम शिष्य परिवार की ओर से स्थापित 501 अखण्ड मनोकामना ज्योति कलश की स्थापना की गई है। इस वर्ष नवमी तिथि के दिन शिष्यों की ओर से हवन सिर्फ पूज्य गुरुदेव महाराज द्वारा ही किया जाएगा। नवमी तिथि पर महाआरती एवं भण्डारा नहीं होगा।