लॉकडाउन में टली शादी, दूल्हे के घर पहुंची दुल्हन - Bhaskar Crime

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लॉकडाउन में टली शादी, दूल्हे के घर पहुंची दुल्हन

 कोरोना संकट के बीच देशभर में 31 मई तक लॉकडाउन की स्थिति है. 

इस दौरान कई लोगों के शादी-विवाह कैंसिल हो गए हैं. कई लोगों की शादी की तारीख आगे बढ़ गई है.

 कई लोगों ने अपनी शादी को दो-तीन बार कैंसिल कर दिया और लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे हैं.

 इस बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सबको हैरान कर दिया है.


लॉकडाउन में टली शादी, शादी न होने के डर से 80 किमी पैदल चल दूल्हे के घर पहुंची दुल्हन, ससुराल वाले हुए भौचक्क

लॉकडाउन के कारण एक लड़की की शादी टली तो वह शादी टूटने के खौफ से इतना डर गई कि 80 किलोमीटर की दूरी पैदल तयकर अपने ससुराल पहुंच गई. इतनी दूरी तय करने के बाद जब वह अपने ससुराल पहुंची तो ससुराल वाले उसे अपने दरवाजे पर देख दंग रह गए. दुल्हन कानपुर देहात जिले से कन्नौज जिले तक पैदल अपनी ससुराल गई.

अपने ससुराल पहुंचने के बाद दुल्हन तुरंत शादी की जिद पर अड़ गई. इसके आगे झुकते हुए अंततः दोनों परिवारों ने दूल्हा-दुल्हन की शादी मंदिर में करवा दी.

कन्नौज के पुलिस अधीक्षक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने खबर की जानकारी देते हुए बताया कि कानपुर देहात के डेरा मंगलपुर के लक्ष्मण तिलक गांव की रहने वाली लड़की शादी के लिए कन्नौज अपने ससुराल पैदल पहुंच गई.

उन्होंने बताया कि डेरा मंगलपुर की रहने वाली 19 साल की इस लड़की का नाम गोल्डी है. उसकी शादी कन्नौज के तालग्राम के बैसपुर निवासी वीरेंद्र कुमार राठौड़ से काफी पहले तय हुई थी. चार मई को इन दोनों की शादी की तारीख तय थी, लेकिन देश में तीसरी बार लॉकडाउन होने के कारण शादी टल गई.

देश में तीसरा लॉकडाउन 17 मई तक था. इसके बाद केंद्र सरकार ने 31 मई तक चौथा लॉकडाउन लागू कर दिया. एक बार और अवधि बढ़ने से दुल्हन को शादी के दूसरी बार भी स्थगित होने का डर सताने लगा. इसके बाद उसने दूल्हे के घर पैदल जाने का फैसला कर लिया. वह बुधवार को अपने घर से निकली और तीन दिन तक पैदल चलकर अपने होने वाले पति के घर पहुंची.

जब दुल्हन अपने पति के दरवाजे पहुंची तो उसे देख दूल्हे के घरवाले भौचक्के रह गए. उन्होंने दुल्हन से घर वापस जाने के लिए कहा. दूल्हे के परिवार ने लड़की को समझाया कि जल्द ही वे नई तारीख तय कर शादी करवा देंगे, लेकिन गोल्डी नहीं मानी. इसके बाद अंततः लड़की की जिद के आगे दूल्हे के परिजनों को मानना पड़ा. फिर दोनों परिवारों की रजामंदी से गांव के मंदिर में दूल्हा-दुल्हन की शादी करा दी गई.