आदिवासी समुदाय के बच्चे सरकारी मदद से विदेशों में बुलंदी पा रहे - Bhaskar Crime

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आदिवासी समुदाय के बच्चे सरकारी मदद से विदेशों में बुलंदी पा रहे

 अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर में अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति दी गई

सरकारी मदद से विदेशों में बुलंदी पा रहे आदिवासी समुदाय के बच्चे

विदेश व उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मिल रही छात्रवृत्ति बनी मददगार। अभी तक करीब 40 विद्यार्थियों ने विदेशों में प्राप्त की शिक्षा।

योजना का और हो प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए

 भोपाल।  प्रदेश के आदिवासी समुदाय के बच्चे सरकारी मदद के पंखों से विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर नई इबारत लिख रहे हैं। आर्थिक दिक्कतें उनके विदेश जाने में बाधक नहीं है। आदिम जाति कल्याण विभाग की ओर से छात्रवृत्ति की सुविधा से वे गांव और शहरों से निकलकर विदेशी यूनिवर्सिर्टी में या तो अध्ययनरत हैं या अध्ययन पूरा कर चुके हैं।


छात्रवृत्ति के लिए सरकार की ओर से फीस के लिए 40,000 यूएस डालर (29 लाख स्र्पये से अधिक) तो वहां रहने के लिए 10,000 यूएस डॉलर (करीब साढ़े सात लाख स्र्पये) दिए जाते हैं। स्नात्कोत्तर व पीएचडी के लिए दो वर्ष के लिए यह मदद दी जाती है। इस साल चार विद्यार्थियों का चयन किया गया है। दो विद्यार्थियों के चयन की प्रक्रिया जारी है।

विद्यार्थी कभी भी इस योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं। विदेश जाने वाले विद्यार्थी शिक्षा पूरी करने के बाद स्वदेश लौटने या विदेश में ही रहने के लिए स्वतंत्र हैं। 

विभाग की ओर से वर्ष 2003-04 से यह छात्रवृत्ति की योजना लागू है। अभी तक करीब 40 विद्यार्थी इस योजना का लाभ ले चुके हैं। उन्हें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्विट्जरलैंड, सिंगापुर में अध्ययन के लिए छात्रवृत्ति दी गई। इनमें से कई विद्यार्थी ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं।

विभाग के उपायुक्त प्रेमकुमार पांडे ने बताया कि* विदेशों के शिक्षण सत्र के हिसाब से विद्यार्थियों को भेजने की व्यवस्था की जाती है। विदेशों से विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम बुलाते हैं। योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता है।

योजना का और हो प्रचार-प्रसार-आदिवासी समुदाय के लिए काम करने वाले संगठनों का कहना है कि इस योजना का और अधिक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। लंबे समय से लागू योजना के बावजूद बेहद कम विद्यार्थियों ने इसका लाभ उठाया है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि विदेश जाने के लिए विद्यार्थियों का तैयार होना मुश्किल होता है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस साल भोपाल से अपर्णा तिरकी का चयन ब्रिटेन और महिमा डेनियल का चयन थाइलैंड के लिए हुआ है। बालाघाट जिले के ग्राम भीमा जौरी की आकृति उइके का ब्रिटेन और शहडोल जिले के ग्राम देंडुवाड़ा की पलकदास का चयन कनाडा के लिए हुआ है। अपर्णा ब्रिटेन जा चुकी हैं। अन्य वहां के शैक्षणिक सत्र के हिसाब से रवाना होंगे।