भैयाजी सरकार के सानिध्य में ग्वारी घाट में किया जल सत्याग्रह - Bhaskar Crime

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भैयाजी सरकार के सानिध्य में ग्वारी घाट में किया जल सत्याग्रह

 माँ नर्मदा को बचाने सैकडों पातालकोट आदिवासी पहुंचे जबलपुर

भैयाजी सरकार के सानिध्य में ग्वारी घाट में किया जल सत्याग्रह, जन जागरण,बनाई मानव शृंखला 

पातालकोट आदिवासी अंचल ने दिया मां नर्मदा को बचाने का संदेश


भक्त निवास भगवान सत्य मारुति परिसर में भजन संकीर्तन कर दादा गुरु समर्थ सदगुरु के स्वास्थ्य लाभ एवं सत्याग्रहों की मांगों को पूरा करने 

प्राण प्रण से संकल्प लिया।नर्मदा मिशन परिवार ने पातालकोट से आये सभी भक्त परिवारों का अभिनदंन स्वागक्त किया।

पातालकोट का मां नर्मदा से प्रत्यक्ष जीवंत संबंध-समर्थ सदगुरु 

आजादी के बाद पहली बार किसी सत्याग्रह आंदोलन में पातालकोट से सेकड़ो भक्त प्रेमी शामिल हुए।

विश्व की अमूल्य धरोहर पातालकोट तामिया परिक्षेत्र जहां मां नर्मदा की सहायक नदियां शक्कर दूधी सितारेवा देनवा तवा जैसी जीवनदायनी पवित्र नदियों का उद्गम है जो मां नर्मदा से मिलती है।

माँ नर्मदा के जल संग्रहण क्षेत्र के साथ गोदावरी जल संग्रहण क्षेत्र भी है गौदावरी से मिलने वाली सहायक नदियां है जाम कन्हान पेंच सुकरी आदि अनेक छोटी नदियों का उद्गम स्थल क्षेत्र है।

विश्व का असाधारण औषधीय वन क्षेत्र भी पातालकोट में है,दुनिया का सबसे बेहतर आहार कोदो कुटकी इसी परिक्षेत्र में होता है।


जिस प्रकार पातालकोट मां नर्मदा का सदियों से सहायक रह अपना योगदान दे रहा है ठीक वैसे ही आज पातालकोट अपना योगदान देने पहुँचा।

पातालकोट परिक्षेत्र के ग्रामों में समर्थ सदगुरु भैयाजी सरकार के प्रति बड़ी आस्था और मान्यता है समर्थ सदगुरु का प्रिय स्थान है जहां स्वयं समर्थ सदगुरु भैयाजी सरकार ने कठोर तप साधना की है, दादा गुरु की तपोस्थली के रूप में भी जाना जाता है।भैयाजी सरकार की दादा गुरु के रूप में समूचा पातालकोट तामिया छिंदवाड़ा परिक्षेत्र में मान्यता है हजारों अनुयायी भक्त मंडल है।

पातालकोट के भक्त प्रेमियों को समर्थ सद्गुरु के अन्न आहार का त्याग कर सत्याग्रह  का संदेश उन तक पहुंचते ही वे पातालकोट से जबलपुर नर्मदा पथ अपने दादा गुरु से मिलने दर्शन करने आज पहुंचे साथ ही सिद्ध घाट ग्वारी घाट में माँ नर्मदा के जल में उतरकर माँ के अस्तित्व को बचाने का संकल्प लिया  । पातालकोट से आये आदिवासी भक्त प्रेमियों ने मानव शृँखला बनाकर  माँ नर्मदा के संरक्षण के लिये सामूहिक चेतना का संदेश दिया ।