बेटे ने अपने लिवर का हिस्सा देकर पिता को दी नई जिंदगी - Bhaskar Crime

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बेटे ने अपने लिवर का हिस्सा देकर पिता को दी नई जिंदगी

 22 साल के बेटे ने अपने लिवर का हिस्सा देकर 52 साल के पिता को दी नई जिंदगी

 चार माह पहले जब लिवर ट्रांसप्लांट का प्रयास किया गया

शहर में दूसरी बार हुआ लाइव लिवर ट्रांसप्लांट, चोइथराम अस्पताल में हुई सफल सर्जरी

लेकिन यह भी डर था कि इम्युनिटी कम होने पर उन्हें कोविड का संक्रमण न हो

इंदौर  ग्वालियर के रहने वाले 22 वर्षीय युवक सुयश के लिवर का 70 फीसदी हिस्सा उनके 53 वर्षीय पिता धीरेंद्र गुप्ता को सफलतापूर्वक शहर के चोइथराम अस्पताल में प्रत्यारोपित किया गया है। शहर में लाइव लिवर ट्रांसप्लांट का यह दूसरा मामला है। इसके पूर्व एक अन्य निजी अस्पताल में इस तरह का ट्रांसप्लांट हो चुका है। अस्पताल में 12 दिसंबर को यह प्रत्यारोपण हुआ और आज रविवार को मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।

मरीज धीरेंद्र पेशे से बैंककर्मी और उन्हें लिवरसिरोसिस की बीमारी हो गई थी। उनके पेट में बार-बार पानी भरने व पैरों में सूजन आने की समस्या हो रही थी। उनकी बेटी इंदौर में रह रही थी इस वजह से उसने पिता का लिवर ट्रांसप्लांट इंदौर में ही करवाने का निर्णय लिया। चार माह पहले जब लिवर ट्रांसप्लांट का प्रयास किया गया, सारी तैयारियां हो चुकी थी लेकिन डोनर सुयश की रक्त जांच में एंजाइम बढ़े हुए आने के कारण ट्रांसप्लांट रद किया गया। इसके बाद 12 दिसंबर को लिवर ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। अब परिवार एक माह इंदौर में रहने के पश्चात वापस अपने घर ग्वालियर लौटेगा। रविवार को मरीज के डिस्चार्ज होने के मौके पर अस्पताल में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित व अपर आयुक्त, राजस्व रजनी सिंह भी उपस्थित थी।

*6.30 घंटे चला ऑपरेशन तीस लोगों की टीम जुटी*

चोइथराम अस्पताल के इस प्रत्यारोपण को लीड करने वाले डॉ. अजय जैन ने बताया कि कोविड के दौर में इस तरह के प्रत्यारोपण को करना काफी मुश्किल था। आर्गन ट्रांसप्लांट सर्जरी से पहले मरीज को इम्युनिटी कम करने की दवाईयां दी जाना थी ताकि रिजेक्शन के खतरे को कम किया जा सके, लेकिन यह भी डर था कि इम्युनिटी कम होने पर उन्हें कोविड का संक्रमण न हो। 12 दिसंबर को करीब 6.30 घंटे ऑपरेशन चला और इस काम में 30 डॉक्टर, नर्स व पैरामेडिकल स्टॉफ की टीम लगी।

सर्जरी करने वाली टीम में डॉ. अजय जैन के साथ डॉ. अजिताभ श्रीवास्तव, डॉ. विवेक विज, डॉ. पियूष श्रीवास्तव, डॉ. विशाल चौरसिया, डॉ. सुदेश शारडा, डॉ. नितिन शर्मा और डॉ. नीरज गुप्ता शामिल थे। चोइथराम अस्पताल में यह 11वां सफल लिवर प्रत्यारोपण किया गया हैं। इसके पहले 10 लिवर प्रत्यारोपण कैडेवर (ब्रेनडेथ मरीजों) के माध्यम से किए गए हैं। अभी तक कई लोग लिवर ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली व मुंबई जाना पसंद करते है लेकिन अब इंदौर शहर में भी इस तरह के सफल प्रत्यारोपण हो रहे है।