मानव अधिकार आयोग का नोटिस जबलपुर निगम आयुक्त को दिया - Bhaskar Crime

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मानव अधिकार आयोग का नोटिस जबलपुर निगम आयुक्त को दिया

 *मानवाधिकार आयोग ने कहा- निगमायुक्त अनूप सिंह हाजिर हों* 

 *सीवर चेंबर व वाटर कनेक्शनों को ध्वस्त करने का मामला*

*जबलपुर निगमायुक्त को दो मामलों में कारण बताओ नोटिस व पांच-पांच हजार रुपये के जमानती वारंट भी जारी।* 

*साफ-सफाई न होने की थी दूसरी शिकायत*

 5 - 5 हजार का जमानती वारंट भी जारी किया


जबलपुर/मध्य प्रदेश मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन ने जबलपुर निगमायुक्त अनूप कुमार सिंह को 25 फरवरी 2021 को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। दो मामलों में कई स्मरण पत्र देने के बावजूद अब तक प्रतिवेदन न भेजने के कारण आयुक्त को उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिये कहा गया है। आयोग ने आयुक्त को दोनों मामलों में कारण बताओ नोटिस एवं पांच-पांच हजार रूपये का जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है। नोटिस व वारंट की तामीली पुलिस अधीक्षक, जबलपुर के माध्यम से कराने के लिए आयोग ने 28 जनवरी को पत्र भेजा था।

*सीवर चेंबर व वाटर कनेक्शनों को ध्वस्त करने का मामला*

 प्रकरणों के अनुसार एक मामले में शिकायतकर्ता जेडी कबीरपंथी ने नगर निगम, जबलपुर द्वारा बिना पूर्व सूचना एवं बिना पर्याप्त कारण के धनवंतरी नगर जबलपुर स्थित एचआइजी ए मकानों के रैम्प, कंजरवेंसी, सीवर चेंबर व वाटर लाइन, कनेक्शनों को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिये जाने के विरूद्व आयोग को शिकायत की थी। शिकायत पर आयोग द्वारा आयुक्त नगर निगम, जबलपुर से प्रथमत: 23 अक्टूबर 2019 तक प्रतिवेदन मांगा था। इसके बाद कई स्मरण पत्र देने के बाद 23 अक्टूबर 2020 को आयुक्त, नगर निगम, जबलपुर अनूप कुमार को नामजद स्मरण-पत्र जारी कर 16 दिसम्बर, 2020 तक प्रतिवेदन देने अन्यथा 16 दिसंबर 2020 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था। परंतु उनके द्वारा न तो प्रतिवेदन दिया गया, न ही आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। इस पर आयोग ने अब 25 फरवरी 2021 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने हेतु नोटिस व पांच हजार रूपये का जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया।

*साफ-सफाई न होने की थी दूसरी शिकायत*

इसी प्रकार शिकायतकर्ता कैलाश दुबे ने नगर निगम क्षेत्र में साफ-सफाई नही होने से डेंगू जैसी जानलेवा बीमारियां फैलने की आशंका व्यक्त कर शिकायत की थी। शिकायत पर आयोग ने आयुक्त से 20 दिसंबर 2019 तक प्रतिवेदन मांगा था। इसके बाद कई स्मरण पत्र देने के बाद 11 नवंबर, 2020 को आयुक्त को नामजद स्मरण पत्र जारी कर 16 दिसंबर, 2020 तक प्रतिवेदन देने अन्यथा 16 दिसंबर, 2020 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किया गया था। परंतु उनके द्वारा न तो प्रतिवेदन दिया गया, न ही आयोग के समक्ष उपस्थित हुए। इस पर आयोग द्वारा अब 25 फरवरी 2021 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने हेतु नोटिस एवं पांच हजार रुपये का जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है।