स्मार्टफोन से रहे सावधान आपकी बातचीत सुन लेता है - Bhaskar Crime

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स्मार्टफोन से रहे सावधान आपकी बातचीत सुन लेता है

 क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने अपने दोस्त के साथ किसी सामान को खरीदने के बारे में बातचीत की हो, 

और अगले दिन स्मार्टफोन पर उसी उत्पाद से संबंधित विज्ञापन आपको दिखने लगा

 अगर हां, तो आपने शायद सोचा हो कि क्या आपका स्मार्टफोन (Smartphone) आपकी बातचीत सुन रहा था.

 लेकिन क्या वाकई ऐसा है? ये महज संयोग नहीं है कि जिस सामान में आपकी रुचि थी, उसके लिए ही आपको संभावित ग्राहक मानकर विज्ञापन दिखाया जाने लगा.


सावधानी है जरूरी

स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नालॉजी (Swinburne University of Technology) के लेक्चरर डाना रेजाजादेगन के मुताबिक इसका ये मतलब भी नहीं है कि आपका फोन वास्तव में आपकी बातचीत सुन रहा है क्योंकि उसे ऐसा करने की जरूरत नहीं है.वहीं इस बात की पूरी संभावना है कि आप उसे पहले ही वह सारी जानकारी दे रहे हों, जिसकी उसे जरूरत है.

कंप्यूटर पर्दे के पीछे काम करते हैं'

डॉक्टर डाना रेजाजादेगन के मुताबिक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) में कई मशीन-लर्निंग तकनीकें होती हैं, जो सिस्टम को आपके डेटा की छंटनी यानी उसे फिल्टर करने के साथ विश्लेषण करने में मदद करती हैं, जैसे डेटा क्लस्टरिंग, एसोसिएशन और रीइन्फोर्समेंट लर्निंग (RL).

एक RL एजेंट उपयोगकर्ता के व्यवहार से प्राप्त फीडबैक के आधार पर खुद को प्रशिक्षित कर सकता है. सोशल मीडिया पोस्ट पर लाइक करने से आप आरएल एजेंट को संकेत भेजते हैं, जो पुष्टि करता है कि आपकी इस पोस्ट में रुचि है या आप शायद इसे पोस्ट करने वाले व्यक्ति में रुचि रखते हैं. अगर आप सोशल प्लेटफॉर्म पर ऐसे 'दिमागी खेल' के बारे में सक्रिय रूप से पोस्ट पसंद करना शुरू करते हैं, तो इसका सिस्टम आपको उन कंपनियों के विज्ञापन भेजेगा, जो संबंधित उत्पादों और सामग्री की पेशकश कर सकती हैं.

फोन आपकी बातचीत को सुन सकते हैं?

लेक्चरर डाना रेजाजादेगन का कहना है कि ज्यादातर लोग नियमित रूप से अपनी जानकारी वेबसाइट और ऐप को देते हैं. हम ऐसा तब करते हैं जब हम उन्हें कुछ अनुमतियां देते हैं, या 'कुकीज' को अपनी ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी की अनुमति देते हैं.

तथाकथित 'फर्स्ट-पार्टीज कुकीज' वेबसाइटों को हमारी बातचीत के बारे में कुछ विवरणों को याद रखने की अनुमति देती है. उदाहरण के लिए, लॉगिन कुकीज आपको अपना लॉगिन विवरण सहेजने देती हैं, ताकि आपको उन्हें हर बार फिर से दर्ज न करना पड़े.

AI एल्गोरिदम से जासूसी?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक AI एल्गोरिदम, डेटा के आधार पर आपके आसपास के लोगों की इस आधार पर रैकिंग कर सकते हैं कि आप उनसे कितनी ज्यादा बातचीत या संपर्क करते हैं. फिर वे न केवल आपके डेटा के आधार पर, बल्कि आपके मित्रों और परिवार के सदस्यों से एकत्र किए गए डेटा के आधार पर भी आपको लक्षित करना शुरू कर सकते हैं.

ऐसे में ऐप विकसित करने वालों को डेटा जमा करने के लिए उपयोगकर्ताओं से अनुमति लेनी होती है और इसके लिए स्पष्ट नियम और शर्तें हैं. इसलिए किसी भी तरह के उपयोगकर्ताओं को ऐसी इजाजत देते समय सावधान रहने की जरूरत है. जरूरत के मुताबिक ही अनुमति दें. व्हाट्सऐप को कैमरे और माइक्रोफोन तक पहुंच देना समझ में आता है, क्योंकि वह इसके बिना अपनी कुछ सेवाएं नहीं दे सकता है. लेकिन, याद रखिए सभी ऐप और सेवाएं केवल वही नहीं मांगेंगी, जो जरूरी है.