सरहद के पार चांद - Bhaskar Crime

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सरहद के पार चांद

अनामिका बहुत खुश थी....
 यह उसका ससुराल में पहला- पहला करवा चौथ था । उसके मायके से करवा का सामान आया तो....
उसकी सास सामान देख कर बहुत खुश हुई क्योंकि, उसके मायके से सामान आवश्यकता से कुछ ज्यादा ही आया था। अनामिका मन ही मन कभी - कभी उदास हो जाती.... 
जिसके लिए वह यह व्रत कर रही है वह उसके पास नहीं है। उसके पति विकास सेना में सरहद पर तैनात हैं । विकास ने अनामिका को शादी से पहले ही अपने नौकरी के संबंध में बता दिया था कि वह सभी तीज त्यौहार में शामिल नहीं हो पाएगा क्योंकि उसकी छुट्टियां बहुत ही सीमित होती हैं। अनामिका ने बहुत सोच समझकर इस रिश्ते के लिए हां कर दी, क्योंकि वह मन ही मन किसी सैनिक की पत्नी बनना चाहती थी...
      
               अनामिका ने अपनी देवरानी,जेठानी के साथ सारा दिन उपवास किया, हाथों में मेहंदी लगाई... और पूरा सोलह सिंगार किया । अनामिका को देखने से लग रहा था कि जैसे वह आज ही दुल्हन बन कर आई हो...बहुत खूबसूरत लग रही थी। सासु मां की बहुत प्यारी बहू है....वह उसे देखें फूली नहीं समा रही थी, बोली -बेटा तुझे नजर न लग जाए आ काला टीका लगा दूं....। शाम को सभी महिलाएं छत पर चांद की पूजा करने के लिए गई । सब एक लम्बी कतार में बैठ कर पूजा करने लगी । पूजा करने के बाद चांद को देख सभी ने एक साथ अर्ध्य दिया....इसके बाद सबके पति अपनी पत्नियों को पानी पिलाने लगे... लेकिन अनामिका एकदम गुमसुम सी खड़ी थी और वह अपनी सास की तरफ देखते हुए पूछने लगी.... 

मां मुझे पानी कौन पिलाएगा ? तो सासू मां ने कहा बेटा! तुम पानी अपने आप पी लो। क्योंकि तुम्हारा पति सरहद पर दुश्मनों को पानी पिला रहा है.... जिसके कारण तमाम सुहागिनें अपने पति के साथ यह त्यौहार मना पा रही हैं । तुम एक बहादुर सैनिक की पत्नी हो । अनामिका ने गर्वित भाव से चंद्रमा को देखते हुए पानी पिया। वह एकटक चंद्रमा को ऐसे देख रही थी मानो चंद्रमा में विकास की छवि दिखाई दे रही हो .....वह ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तन मन से तैयार थी ।

सुनीता मुखर्जी
   (स्वरचित)
गाजियाबाद उत्तर प्रदेश