जिले की शराब दुकानों को आवंटन मात्र 4 ठेकेदार पहुंचे - Bhaskar Crime

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जिले की शराब दुकानों को आवंटन मात्र 4 ठेकेदार पहुंचे

 अपर कलेक्टर  आबकारी आयुक्त और अधिकारी ठेकेदार के इंतजार में शाम तक बैठे रहे


दिन भर ठेकेदारों के इंतजार में कलेक्टर कार्यालय में अधिकारी और आपकारी विभाग के लोग बैठे रहे

 जिले की शराब दुकानों को आवंटन किया जा रहा है कलेक्ट्रेट कार्यालय में मात्र 4 ठेकेदार  पहुंचे अनेक दुकानें अभी भी ठेकेदार विहीन हैं 


शराब दुकानदारों की बोली को लेकर अब ठेकेदार एकजुट हो गए हैं और रेट कम होने के इंतजार में अभी ठेका नहीं ले रहे हैं

शराब ठेकेदार द्वारा यह अंदाज लगाया जा रहा है कि इस बार फिर सिंडिकेट बनाकर शराब बेचेंगे

जबलपुर // जिले की शराब दुकानों को आवंटन किया जा रहा है। मंगलवार को आबकारी विभाग ने दूसरे चरण की टेंडर प्रक्रिया की। 45 में से 24 समूह की शराब दुकानों के लिए टेंडर बुलवाए गए थे, लेकिन महज 4 समूह की दुकानों के लिए पांच टेंडर आए। इन दुकानों को 45 करोड़ 45 लाख 84 हजार रुपये में दिया गया।दरअसल कलेक्ट्रेट में आबकारी विभाग द्वारा पिछले तीन दिनों से बंद कमरे में टेंडर प्रक्रिया चल रहा थी। 

मंगलवार को इसे अंतिम रूप देते हुए विभाग ने टेंडर करने वाले ठेकेदारों को अधारताल, सिहोरा, कुंडम और बघराजी की शराब दुकानों को ठेके पर दे दिया गया। 20 समूह की दुकान अब भी बिना मालिक के: इस बार समूह में दुकानों को बांटने के बाद कई चरण में टेंडर प्रक्रिया पूरी हो रही है। हालांकि इस प्रक्रिया में कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। विभाग ने जिन शराब माफियों से बचने के लिए यह प्रकिया को किया, उन्होंने दूसरों के नाम पर दुकानों का आवंटन उठा लिया है। विभाग का दावा है कि एक अप्रैल से नई शराब नीति के तहत इस बार टेंडर प्रक्रिया के नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। इसका असर अप्रैल में दिखने लगेगा।


चार समूह के लिए आए टेंडर: आबकारी विभाग के सहायक आयुक्त रविन्द्र मानिपुरी ने बताया कि इस बार जबलपुर जिले की शराब दुकानों को 45 ग्रुप में बांटा गया है। इसके तहत पहले चरण की टेंडर प्रक्रिया में 45 में से 21 समूह की दुकानों को 303 करोड़ में टेंडर किया गया था। मंगलवार को दूसरे चरण के टेंडर में शेष 24 समूह के लिए टेंडर बुलाया गया, जिसमें 4 समूह की ही दुकानों को टेंडर आवंटित किया गया। विभाग को इनसे सालाना 45 करोड 45 लाख 84 हजार 553 रुपये मिलेगा। जबकि पिछले साल 44 करोड़ 23 लाख 72 हजार 321 रुपये में दी गई थीं।